Tamil Nadu State General Knowledge

  दक्षिण भारत का प्राचीन काल में तिरूपति पहाडियों से लेकर कन्याकुमारी तक प्रायद्वीपीय भारत का धुर-दक्षिणी तमिलकम् या तमिलहम् कहलाता था जो पूर्व और पश्चिम में समुद्र से घिरा था । संगम काल में इस क्षेत्र पर चोल,  पाण्ड्य एवं चेर राजवंश ने शासन किया । बाद के काल में पल्लव, चोल राजवंश ने इस क्षेत्र में शासन किया । दूसरी ओर प्रायद्वीपीय भारत के दक्कन क्षेत्र में चालुक्य एवं राष्टकूटों ने अपनी सत्ता स्थापित की ।



तमिलनाडु राज्य का इतिहास 

तमिलनाडु का इतिहास अत्यंत प्राचीन है । संगमकालीन ग्रंथों में क्षेत्र का उल्लेख मिलता है । पल्लव राजाओं के समय से तमिलनाडु का लिखित इतिहास उपलब्ध हो पाता है । वर्ष 1901 में अंग्रेजों द्वारा मद्रास प्रेसीडेंसी की स्थापना की गई जिसमें दक्षिण प्रायद्वीप के अधिकतर हिस्सों को शामिल किया गया ।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् मद्रास प्रेसीडेंसी के कुछ को बाँटकर केरल,  आन्ध्र प्रदेश एवं कर्नाटक राज्यों में मिलाया गया तथा शेष भाग मद्रास राज्य के नाम से जाना गया । वर्ष 1968 में मद्रास का नाम बदलकर तमिलनाडु कर दिया गया ।

सीमाएँ उत्तर में आन्ध्र प्रदेश,  दक्षिण में हिन्द महासागर,  पूर्व में बंगाल की खाड़ी एवं पश्चिम में केरल तथा कर्नाटक । इस राज्य में एक लम्बा समुद्रतटीय भाग है तथा पूर्वी घाट इसके समानांतर फैला हुआ है । पूर्वी एवं पश्चिमी घाट पर्वत इसी प्रदेश में नीलगिरी घाट के समीप है । उड्गमण्डलम्  ( ऊटी ), कोडईकनाल ,कोटागिरि एवं यरकाउड यहाँ के हिल स्टेशन है ।


राज्य का पश्चिमी एवं उत्तर -पूर्वी भाग पहाड़ी है।केरल की सीमा से लगते हुए पश्चिमीघाट की उपस्थिति के कारण दक्षिण -पश्चिमी मानसून से होने वाली वर्षा इस क्षेत्र को प्राप्त नहीं होती है तथा वृष्टिछाया प्रदेश बन जाता है । राज्य का पूर्वी तटीय भाग समतल एवं उपजाऊ है ।डोडाबेट्टा  (2,639मी) राज्य की सबसे चोटी है ।

जलवायु तमिलनाडु मुख्यतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर प्रदेश है कभी-कभी मानसून के विफल होने की स्थिति में वहाँ सूखा पड़ता है । यहाँ वर्ष में दो बार वर्षा होती है -जून से सितंबर माह के मध्य दक्षिण -पश्चिमी मानसून द्वारा एवं अक्टूबर से दिसंबर माह के मध्य उत्तर -पूर्वी मानसून द्वारा । जनवरी से मई तक यहाँ का मौसम शुष्क रहताहै ।


नदियाँ यहाँ 17 नदी द्रोणियाँ पाई जाती है - चेन्नई बेसिन, पलार , पोन्नयार,  बेल्लार,  पारावनार, कावेरी, अग्नियार,  कोड्डयार, वराहनन्दी,  पम्बार,  कोट्टकरियार,  वैगई, गुण्डार, वैपार,  कल्लर, थाम्बरपारारानी एवं नाम्बियार । इनमें से कावेरी बेसिन सबसे चौड़ा है ।

वन कुल भौगोलिक भू-भाग के 20.26% भाग पर वन पाए जाते हैं । यहाँ 9 प्रकार के वन पाए जाते हैं - उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन, उष्णकटिबंधीय अर्द्ध-सदाबहार वन, उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन,  तटीय एवं दलदली वन, शुष्क पर्णपाती वन, उष्णकटिबंधीय काँटेदार वन,  उष्णकटिबनीय शुष्क सदाबहार वन , उपोष्ण चौड़ी पत्ती वाले पर्वतीय वन तथा पर्वतीय आर्द्र शीतोष्ण वन।


कृषि यहाँ उत्पादित की जाने वाली प्रमुख फसलें हैं- चावल,  ज्वार,  दालें,  गन्ना,  कपास,  सूरजमुखी,  नारियल, काजू, मिर्च एवं मूँगफली इत्यादि । यहाँ उत्पादित होने वाली अन्य फसलें हैं- चाय, कॉफी,  इलायची एवं रबड़ ।


खनिज यहाँ पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं - फेल्सपार, जिप्सम, चूना -पत्थर,  क्वार्टजाइट, चीनी मिट्टी,  गरनेट, बॉक्साइट,  डोलोमाइट इत्यादि ।


उद्योग राज्य के प्रमुख उद्योगों में सूती कपड़ा उद्योग,  भारी वाणिज्यिक वाहन,  ऑटो कल-पुर्जे, रेल डिब्बे,  विद्युत चालित पम्प, चमड़ा उद्योग,  सीमेंट, चीनी, कागज, ऑटोमोबाइल एवं माचिस उद्योग शामिल है । इसके अतिरिक्त सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव -प्रौद्योगिकी आधारित उद्योग भी यहाँ कार्यरत् है ।


शक्ति परियोजनाएँ कुडनकुलम् ऊर्जा संयंत्र,  मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन  (कलपक्कम् ), तूतीकोरिन तापीय ऊर्जा स्टेशन  (तूतीकोरिन ), नेयवेली -1 व 2  तापीय ऊर्जा स्टेशन  (कुड्डेलोर), मेटटूर तापीय ऊर्जा स्टेशन  (सलेम ), कुट्टांलम गैस टर्बाइन पावर स्टेशन,  मेट्टूर जल-विद्युत संयंत्र  इत्यादि ।


बन्दरगाह चेन्नई तथा तूतीकोरिन प्रमुख बन्दरगाह है । कुड्डालूर व नागापत्तन सहित सात अन्य बन्दरगाह है ।


पर्यटन स्थल मेरीन बीच  (चेन्नई ), महाबलीपुरम्, पुमपुहार बीच, कन्याकुमारी,  कैथरीन जलप्रपात, कोट्टागिरि(कुन्नुर ), सुरीली जलप्रपात  (मेघामलई पर्वत श्रेणी ), बृहदेश्वर मंदिर,  कोर्टल्लम  ( स्पा ऑफ द साउथ ), तिरुन्लवेली, पश्चिमी घाट में अवस्थित इत्यादि प्रमुख पर्यटन केन्द्र है ।


अन्य प्राकृतिक पर्यटन केन्द्र  इन्दिरा गाँधी नेशनल पार्क एवं सेंचुरी, मुक्कुरथी नेशनल पार्क, गुण्डी नेशनल पार्क, अन्ना जूलॉजिकल पार्क, कालवुड्डू वाइल्डलाइफ सेंचुरी इत्यादि ।


जनजातियाँ अडियार, इरावलन, इरूलर, कदार, कनिक्कर, कोरगा, कुरूम्बम आदि ।




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