Mahajanpada Period
प्राचीन काल में सोलह महाजनपद में सबसे शक्तिशाली मगध (महाजनपद ) राजगृह (राजधानी ) था
सोलह महाजनपद के नाम तथा राजधानी प्रकार है -
महाजनपद के नाम राजधानी
1. मगध राजगृह
2. अवन्ति उज्जयिनी / महिष्मती
3. वज्जि वैशाली
4. कौशल श्रावस्ती
5. काशी वाराणसी
6 . अंग चम्पा
7. मल्ल कुशीनारा
8. चेदी सोथीवती
9. वत्स कौशांबी
10. कुरु हस्तिनापुर
11. मत्स्य विराटनगर
12. पांचाल अहिच्छत्र / काम्पिल्य
13. सूरसेन मथुरा
14. गान्धार तक्षशिला
15. कम्बोज राजपुरा
16. अश्मक पोतन
सोलह महाजनपदों में मगध, कौशल, वत्स एवं अवन्ति सर्वाधिक शक्तिशाली थे । धीरे-धीरे मगध ने अन्य तीनों महाजनपदों को पराजित कर अपने साम्राज्य में मिला लिया । मगध के उत्कर्ष के कारण थे -
● विस्तृत उपजाऊ मैदान
●प्राकृतिक सुरक्षा
●खनिज संसाधनों की प्राप्ति ( विशेषकर लोहा )
●नदी मार्ग व्यापार एवं स्थलीय व्यापार
●वन क्षेत्र एवं हाथियों की उपलब्धता
●कृषि में लोहे का प्रयोग
●धान की रोपाई पध्दति का विकास
●कृषि में दासों एवं कर्मकारों को लगाया जाना
● नवीन धर्मों का उदय
●सामाजिक खुलापन तथा प्रगतिशील दृष्टिकोण
उपरोक्त कारणों से अधिशेष की स्थिति आई जिससे शिल्प एवं उद्योग धन्धों का विकास हुआ तथा वाणिज्य -व्यापार एवं मुद्रा अर्थव्यवस्था का विकास हुआ । अतः छठी सदी ई.पू. में द्वितीय नगरीकरण प्रारंभ हुआ जिससे राज्य निर्माण प्रक्रिया को बल मिला ।
मगध पर हर्यंक वंश, शिशुनाग वंश एवं नन्द वंश ने शासन किया ।
व्याकरणविद् पाणिनी
पूर्व मौर्य काल के प्रसिद्ध विद्वानों में से एक पाणिनी ने संस्कृत भाषा के व्याकरण की रचना की । उन्होंने स्वरों तथा व्यंजनों को एक विशेष क्रम में रखकर उनके आधार पर सूत्रों की रचना की । ये सूत्र बीजगणित के सूत्रों से काफी मिलते जुलते हैं । इसका प्रयोग कर उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रयोग के नियम लघु सूत्रों (लगभग 3000) के रूप में लिखे ।
विदेशी आक्रमण
●ईरानी आक्रमण
●यूनानी आक्रमण ( सिकन्दर का आक्रमण )
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